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(मानित विश्वविद्यालय) |
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| (मानव संसाधन विकास मंत्रालय,भारत सरकार के तत्त्वाधान में संचालित ) |
| English Version | हिन्दी संस्करण |
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संस्थान की गतिविधियाँ [Activities] संस्थान निम्नलिखित गतिविधियों के द्वारा अपने निर्धारित उद्देश्यों की पूर्ति के लिए सतत प्रयत्नशील हैं शिक्षण संस्थान के अंगभूत परिसरों में संस्थान द्वारा निर्मित पाठयक्रम के आधार पर प्राकशास्त्री से लेकर आचार्य स्तर तक का शिक्षण प्रदान किया जाता है। संस्थान द्वारा संचालित और संस्थान के सम्बद्ध संस्कृत संस्थाएँ भी उक्त पाठयक्रम के अनुसार अध्यापन-कार्य सम्पन्न करती हैं। प्रशिक्षण परिसरों में शिक्षण अभ्यास पर बल देते हुए एक शैक्षणिक सत्र के शिक्षक-प्रशिक्षण पाठयक्रम का संचालन किया जाता है जिससे संस्कृत में बी.एड.के समकक्ष शिक्षा-शास्त्री की उपाधि प्रदान की जाती हैं। शोध सभी परिसरों में छात्रों का शोध हेतु पंजीयन संस्थान द्वारा आयोजित अखिल भारतीय प्रवेश-परीक्षा में सफलता के आधार पर या नेट उत्तीर्णता के आधार पर होता है और शोध-कार्य के सफल समापनपर उन्हें पी-एच.डी. के समकक्ष विद्यावारिधि की उपाधि प्रदान की जाती है।
प्रकाशन
संस्कृत पाण्डुलिपियों का संग्रहण एवं संरक्षण दूरस्थ शिक्षा, पत्राचार एवं अनौपचारिक रीति से संस्कृत शिक्षण, शिक्षक-प्रशिक्षण तथा स्वाध्याय सामग्री का निर्माण –- वर्तमान में निम्नलिखित कार्यक्रम संचालित हो रहे हैं - दूरस्थ शिक्षा दूरस्थ शिक्षा के अंतर्गत विभिन्न पाठयक्रमों के संचालनार्थ संस्थान के मुख्यालय में मुक्त स्वाध्याय पीठ तथा स्वाध्यायकेन्द्र की स्थापना की गई है तथा संस्थान के परिसरों में स्वाध्याय केन्द्र स्थापित किये जा रहे हैं। पत्राचार के माध्यम से संस्कृत देश-विदेश के प्रारम्भिक संस्कृत शिक्षणार्थियों को हिन्दी एवं अंग्रेजी माध्यम से संस्कृत भाषा सिखाने हेतु द्विवर्षीय पत्राचार का संचालन करता है। अनौपचारिक संस्कृत शिक्षण संस्थान अखिल भारतीय स्तर पर अनौपचारिक संस्कृत शिक्षण केन्द्रों के माध्यम से क्रमिक संस्कृत स्वाध्याय सामग्री जिसे दीक्षा पाठयक्रम कहते है, का संचालन करता है। संस्कृत भाषा शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान संस्कृत भाषा शिक्षण हेतु अखिल भारत स्तर पर शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है। शास्त्रीय ग्रन्थों का उन्नत शिक्षण संस्थान शास्त्रीय ग्रन्थों के विशिष्ट अध्ययन एवं शिक्षण हेतु विशिष्टाध्ययन कार्यक्रम का आयोजन करता है। स्वाध्याय सामग्री का निर्माण संस्थान संस्कृत भाषा शिक्षण की मुद्रित एवं इलेक्ट्राँनिक सामग्री का निर्माण एवं उसका प्रचार-प्रसार भी करता है। इलेक्ट्राँनिक माध्यमों से संस्कृत कार्यक्रमों का प्रसारण संस्थान इग्नु के ज्ञानदर्शन के भाषा-मन्दाकिनी चैनल के माध्यम से प्रतिदिन संस्कृत कार्यक्रम प्रसारित करता है। डी.डी. इंडिया तथा डी.डी. भारती पर संस्कृत भाषा शिक्षण के कार्यक्रम का प्रसारण भी सप्ताह में तीन बार संस्थान के द्वारा किया जाता है। पारम्परिक पद्धति से संस्कृत शिक्षण हेतु पाठयक्रम-निर्धारण अपने परिसरों तथा सम्बद्ध संस्थाओं में पारम्परिक पद्धति से संस्कृत शिक्षण हेतु प्रथमा से आचार्य (शास्त्री, शिक्षा-शास्त्री, आचार्य) तक सभी कक्षाओं के पाठयक्रम का निर्धारण करता है। परीक्षा परिसरों की स्थापना संस्थान पारम्परिक पद्धति से संस्कृत शिक्षण हेतु देश के विविध प्रान्तों में अपने परिसरों की स्थापना, अधिग्रहण व संचालन करता है। वर्तमान में संस्थान के नई दिल्ली स्थित मुख्यालय के अतिरिक्त दस अंगभूत परिसर हैं। छात्रवृत्ति
संस्थान देश भर में अपने अंगभूत परिसरों तथा अन्य शैक्षणिक संस्थाओं में अध्ययनरत संस्कृत के सुयोग्य छात्रों को छात्रवृत्तियाँ
प्रदान करता है। ये छात्रवृत्तियाँ दो प्रकार की है
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