RASHTRIYA SANSKRIT SANSTHAN

Deemed University

56-57 Institutional Area,JanakPuri , New Delhi
 
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संस्कृत संस्करण

ई-पुस्तक

आई.ए.एस.एस.

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 कार्यकृत्य [Function]

संस्थान के अन्तर्गत अभी तक निम्नलिखित दस परिसर परिसर देश के विभिन्न राज्यों में संस्कृत विद्या के केन्द्र के रुप मे काम कर रहे है।

 

1.

गंगानाथ झा परिसर, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश

2. श्री रणवीर परिसर, जम्मू और कश्मीर
3. श्री सदाशिव परिसर, पुरी, उडीसा
4. गुरूवायूर परिसर, पुरानाटुकरा, त्रिचूर, केरला
5. जयपुर परिसर, जयपुर, राजस्थान
6. लखनऊ परिसर,  लखनऊ, उत्तर प्रदेश
7. राजीव गांधी परिसर, श्रृंगेरी, कर्णाटक
8. गरली परिसर, गरली, हिमाचल प्रदेश
9. भोपाल परिसर, भोपाल, मध्य प्रदेश
10. के. जे. सौमैया संस्कृत विद्यापीठ, मुम्बई परिसर, मुम्बई, महाराष्ट्र
   

    राष्ट्रिय संस्कृत संस्थान निम्नलिखित कार्यो के लिए सदा प्रयत्नशील है--

  1. शिक्षण -

संस्थान के अंगभूत परिसरों में संस्थान द्वारा निर्मित पाठ्यक्रम के आधार पर प्राक्-शास्त्री से लेकर आचार्य स्तर का शिक्षण प्रदान किया जाता है। संस्थान द्वारा संचालित और संस्थान से सम्बद्ध संस्कृत संस्थाएँ भी उक्त पाठ्यक्रम के अनुसार अध्यापन-कार्य सम्पन्न करती हैं।

  1. प्रशिक्षण -

परिसरों में शिक्षण अभ्यास पर बल देते हुए एक शैक्षणिक सत्र के शिक्षक-प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का संचालन किया जाता है जिससे संस्कृत में शिक्षा आचार्य(एम.एड.) एवं शिक्षा शास्त्री (बी.एड.) उपाधि प्रदान की जाती है।

  1. शोध -

      i.              सभी परिसरों में छात्रों का शोध हेतु पंजीयन संस्थान द्वारा आयोजित        अखिल भारतीय प्रवेश-परीक्षा में सफलता के आधार पर या नेट् उत्तीर्णीता     के आधार पर होता है और शोध-कार्य के सफल समापन पर उन्हें  विद्यावारिधि (पी0 एच0 डी0) की उपाधि प्रदान की जाती है।

     ii.           संस्थान संस्कृत वाङ्मय के विभिन्न अंगों पर शोध कार्यक्रमों का उत्तरदायित्व  निर्वहण करता है।

     iii.          दुर्लभ संस्कृत पाण्डुलिपियों के सम्पादन प्रकाशन का कार्य करता है।

    iv.            गङ्गानाथ झा परिसर, इलाहाबाद का एकमात्र उद्देश्य चयनित शाखाओं में शोध एवं सम्पादन है।

  1. प्रकाशन -

                                                              I.      अपने अंगभूत परिंसरों द्वारा सम्पादित शोध-ग्रन्थों और दुर्लभ संस्कृत पाण्डुलिपियों का प्रकाशन करता है।

                                                           II.      संस्थान मुख्यालय द्वारा संस्कृत-विमर्श नामक अर्धवार्षिक तथा गङ्गानाथ झा परिसर द्वारा त्रैमासिक शोध-पत्रिका और उशती नामक साहित्यिक पत्रिका का प्रकाशन।

                                                         III.      मौलिक संस्कृत ग्रन्थों के प्रकाशन हेतु विद्वानों एवं संस्थाओं को 80 प्रतिशत आर्थिक सहायता प्रदान करता है।

                                                        IV.      प्रकाशकों के माध्यम से अप्राप्य तथा दुर्लभ संस्कृत ग्रन्थों के प्रकाशनार्थ आर्थिक सहायता दी जाती है।

                                                           V.      संस्थान समय-समय पर विभिन्न ग्रन्थमालाओं का प्रकाशन करता है। अब तक संस्थान का निम्नलिखित ग्रन्थमालाएँ आरम्भ की जा चुकी हैः-

        रजत जयन्ती ग्रन्थमाला

        स्वतन्त्र भारत स्वर्ण जयन्ती ग्रन्थमाला

        संस्कृत वर्ष स्मृति ग्रन्थमाला

  1. संस्कृत पाण्डुलिपियों का संग्रहण एवं संरक्षण -

                                                              I.      संस्थान संस्कृत पाण्डुलिपियो का संग्रह तथा संरक्षण करता है। शुल्क के आधार पर संस्थाओं को पाण्डुलिपियों की प्रतियाँ भी उपलब्ध कराता है।

                                                           II.    गङ्गानाथ झा परिसर के पाण्डुलिपि-संग्रहालय में विभिन्न शास्त्रों से    सम्बन्धित पचास हजार से भी अधिक पाण्डुलिपियाँ उपलब्ध हैं।

  1. पत्राचार एवं अनौपचारिक रीति से संस्कृत शिक्षण, शिक्षक-प्रशिक्षण तथा स्वाध्याय सामग्री का निर्माण -

वर्तमान में निम्नलिखित कार्यक्रम संचालित हो रहे हैं :-

                                                             I.      पत्राचार के माध्यम से संस्कृत -

देश-विदेश के प्रारम्भिक संस्कृत शिक्षणार्थियों को हिन्दी एवं अंग्रेजी माध्यम भाषा सिखाने हेतु द्विवर्षीय पत्राचार पाठ्यक्रम का संचालन करता है।

                                                          II.      अनौपचारिक संस्कृत शिक्षण -

संस्थान अखिल भारतीय स्तर पर अनौपचारिक संस्कृत शिक्षण केन्द्रों के माध्यम से क्रमिक संस्कृत स्वाध्याय सामग्री जिसे दीक्षा पाठ्यक्रम कहते है, का संचालन करता है।

                                                       III.      संस्कृत भाषा शिक्षक प्रशिक्षण -

संस्कृत संस्कृत भाषा शिक्षण हेतु अखिल भारत स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है।

                                                        IV.      शास्त्रीय ग्रन्थों का उन्नत शिक्षण -

संस्थान शास्त्रीय ग्रन्थों के विशिष्ट अध्ययन एवं शिक्षण हेतु विशिष्टाध्ययन कार्यक्रम का आयोजन करता है।

                                                           V.      स्वाध्याय सामग्री का निर्माण -

संस्थान भाषा संस्कृत शिक्षण की मुद्रित एवं इलेक्ट्रानिक सामग्री का निर्माण एवं उसका प्रचार-प्रसार भी करता है।

  1. इलेक्ट्रानिक माध्यमों से संस्कृत कार्यक्रमों का प्रसारण -

संस्थान इन्दिरा गाँधी राष्ट्रिय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू)  के ज्ञानदर्शन के भाषा-मन्दाकिनी चैनल के माध्यम से एवं प्रसार भारती के डी0 डी0 भारती, डी0 डी0 इण्डिया चैनल से संस्कृत कार्यक्रम प्रसारित करता है।

  1. पारम्परिक पद्धति से संस्कृत शिक्षण हेतु पाठ्यक्रम-निर्धारण -

अपने परिसरों तथा सम्बद्ध संस्थाओं में पारम्परिक पद्धति से संस्कृत शिक्षण हेतु प्रथमा से आचार्य(शास्त्री, शिक्षा-शास्त्री, आचार्य) तक सभी कक्षाओं के पाठ्यक्रम का निर्धारण करता है।

  1. परीक्षा -

                                                              I.      संस्थान सम्बद्ध संस्थाओं द्वारा संचालित संस्थान के समस्त पाठ्यक्रमों के लिए परीक्षाओं का आयोजन करता है। उत्तरमध्यमा/प्राक्शास्त्री(12वीं), शास्त्री(बी.ए.) और आचार्य (एम0 ए0) के प्रमाण-पत्र/उपाधियाँ प्रदान करता है। कक्षा में सर्वप्रथम एवं अपने-अपने शास्त्र में सर्वप्रथम आने वाले छात्रों को स्वर्णपदक प्रदान किया जाता है।

                                                           II.      शिक्षा-शास्त्री पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु अखिल भारतीय पूर्वशिक्षाशास्त्री प्रवेश परीक्षा(पी.एस.एस.टी.) का आयोजन करता है।

                                                         III.      परिसरों एवं सम्बद्ध संस्थाओं के शोध-कर्ताओं को उनके शोध-प्रबन्ध के मूल्याकंन तथा मौखिक परीक्षण के पश्चात् विद्यावारिधि (पी.एच.डी.) की उपाधि प्रदान करता है।

  1.  परिसरों की स्थापना -

संस्थान पारम्परिक पद्धति से संस्कृत शिक्षण हेतु देश के विविध प्रान्तों में अपने परिसरों की स्थापना, अधिग्रहण व संचालन करता है। वर्तमान में संस्थान के नई दिल्ली स्थित मुख्यालय के अतिरिक्त दस अंगभूत परिसर है।

  11.  छात्रवृत्तियाँ -

संस्थान देश भर में अपने अंगभूत परिसरों तथा अन्य शैक्षणिक संस्थाओं में अध्ययनरत संस्कृत के सुयोग्य छात्रों को छात्रवृत्तियाँ प्रदान करता है। ये छात्रवृत्तियाँ दो प्रकार की हैः

                                                              I.      उच्चमाध्यमिकोत्तर छात्रवृत्तियाँ (स्नातकोत्तर स्तर तक)

                                                           II.      शोध छात्रवृत्तियाँ

   12.   केन्द्र सरकार की योजनाएँ -

संस्थान संस्कृत भाषा और साहित्य के संवर्धन तथा प्रचार हेतु मानव संसाधन विकास मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रवर्तित निम्नलिखित विविध योजनाओं का कार्यान्वयन करता हैः

                                                             I.      शास्त्र चूडामणि योजना -

इस योजना के अन्तर्गत संस्कृत के विख्यात सेवा-निवृत्त विद्वानों को संस्थान के परिसरों तथा अन्य संस्कृत संस्थाओं में दो वर्ष की अवधि(एक वर्ष के लिए वर्धनीय) के लिए नियुक्त किया जाता है। वे शिक्षकों और छात्रों को संस्कृत वाङ्मय के विभिन्न शास्त्रों/विद्या विशेषों में गहन शिक्षण प्रदान करते हैं।

                                                          II.      ग्रन्थ-क्रय योजना -

इस योजना के अधीन  संस्थान लेखकों और प्रकाशकों से संस्कृत ग्रन्थों का क्रय करके संस्कृत संस्थाओं को निःशुल्क वितरित करता है।

                                                       III.      संस्कृत शब्दकोश परियोजना -

ऐतिहासिक सिद्धान्तों के आधार पर 1500 ई.पू. से 1900 ई. तक की अवधि का एक अति व्यापक संस्कृत शब्दकोश डेकन कालेज, पूना के द्वारा तैयार किया जा रहा है जिसे वित्तीय सहायता दी जाती है।

                                                        IV.      व्यावसायिक प्रशिक्षण योजना -

इस योजना के अन्तर्गत चुने हुए संगठनों को ज्योतिष, कर्म-काण्ड, पुरालिपि-शास्त्र, सूची-निर्माण, पाण्डुलिपि विज्ञान, संस्कृत आशुलिपि और टङ्कण आदि विषयों में कार्यशालाओं के आयोजन हेतु तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण देने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

                                                           V.      आदर्श संस्कृत महाविद्यालयों/शोध संस्थानों के रूप में मान्यता प्राप्त संस्थाओं को वित्तीय सहायता -

इस योजना के अन्तर्गत देश के विभिन्न भागों में 23 संस्थाएँ संस्थान के अधीन चल रही है। इन संस्थाओं को व्यय की आवर्ती मदों पर 95% तथा अनावर्ती मदों पर 75% अनुदान दिया जाता है।

                                                        VI.      भारत के राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित विद्वानों को मानदेय राशि -

संस्थान भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रतिवर्ष सम्मानित संस्कृत के 15, प्राकृत का 1, अरबी के 3 और फारसी के 3 प्रख्यात विद्वानों में से प्रत्येक को 50,000/- रूपए की वार्षिक मानदेय राशि प्रदान करती है। युवा संस्कृत विद्वान के सम्मानार्थ प्रतिवर्ष एक लाख रूपए का महर्षि बादरायण पुरस्कार आरम्भ किया गया।

                                                     VII.      अखिल भारतीय वाक्स्पर्धा प्रतियोगिता -

संस्थान प्रत्येक वर्ष देश के विभिन्न भागों में आठ शास्त्रीय विषयों पर अखिल भारतीय वाक्स्पर्धा आयोजित करता है जिससे पारम्परिक संस्कृत छात्रों को शास्त्रीय संस्कृत भाषा में आशु भाषण में प्रोत्साहित किया जा सके। श्लोकान्त्याक्षरी, समस्या-पूर्ति तथा शलाका प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाता है।

                                                  VIII.      स्वैच्छिक संस्कृत संगठनों को वित्तीय सहायता -

इस योजना के अन्तर्गत चयनित संगठनों को संस्कृत शिक्षकों के वेतन, छात्रों की छात्रवृत्ति, पुस्तकालय अनुदान और संस्था के भवन-निर्माण के रूप में वित्तीय सहायता दी जाती है।

   13.   अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग -

संस्थान अन्तर्राष्ट्रीय समितियों के सहयोग से अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर संस्कृत सम्मेलनों का आयोजन करता है । इस सन्दर्भ में उल्लेखनीय है कि संस्थान ने प्रथम विश्व संस्कृत सम्मेलन का आयोजन नई दिल्ली में वर्ष 1972 में, पञ्चम विश्व संस्कृत सम्मेलन का आयोजन वाराणसी में वर्ष 1981 में और दशम विश्व संस्कृत सम्मेलन का आयोजन बेंगलूर में 3-9 जनवरी 1997 को किया।

 

 

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